सइद जाफरी

सन 1972 के किसी दिन की बात है। सत्यजित रे लंदन से कोई खिताब लेकर एयर इंडिया की एक फ्लाइट से वापस लौट रहे थे। उस फ्लाइट का नाम था एंपिरर शाहजहां। इत्तेफ़ाक से उस दिन के लगभग एक साल पहले सईद जाफ़री ने अमेरिका में एक नाटक किया था जिसमें उन्होंने मुगल एंपिरर शाहजहां का किरदार ही निभाया था। एयर इंडिया की जिस फ्लाइट "एंपिरर शाहजहां" से सत्यजित रे साहब वापस लौट रहे थे उसका स्टोप लेबनान की राजधानी बेरूत में भी था। बेरूत में जब वो फ्लाइट लैंड हुई तो इत्तेफ़ाकन उस दिन बेरूत हवाई अड्डे पर सईद जाफ़री भी मौजूद थे।
सईद जाफ़री उस ज़माने से सत्यजित रे के फैन थे जब वो ऑल इंडिया रेडियो में नौकरी करते थे और उन्होंने सत्यजित रे की पहली फिल्म "पाथेर पांचाली" देखी थी। इसलिए जब बेरूत हवाई अड्डे पर सईद जाफ़री ने सत्यजित रे को देखा तो ये उनसे मिलने, बात करने उनके पास पहुंच गए। सईद जाफ़री ने उनसे बताया कि मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूं। आपकी सभी फिल्में देख चुका हूं। जवाब में सत्यजित रे बोले,"आई नो हू यू आर। यू आर सईद जाफ़री। आरन्ट यू?" सईद जाफ़री हैरान रह गए। उन्होंने सत्यजित रे जी से पूछा कि आप मुझे कैसे जानते हैं। सत्यजित रे ने सईद जाफ़री को बताया कि मैंने तुम्हें "द गुरू" में देखा था। तुमने उसमें मुराद का कैरेक्टर प्ले किया था ना?। मुझे उस फिल्म में सबसे अच्छा काम तुम्हारा ही लगा था।
सत्यजित रे जैसे शानदार फ़िल्मकार से अपनी तारीफ़ सुनकर सईद जाफ़री उस दिन बहुत खुश हुए। उन्होंने सत्यजित रे साहब से कहा कि मैं किसी दिन आपकी किसी फ़िल्म में भी काम करना चाहूंगा। इसके जवाब में सत्यजित रे थोड़ा मज़ाकिया लहज़े में बोले,"मैं ये भी जानता हूं कि तुम इंतज़ार करने में माहिर हो। थोड़ा इंतज़ार करो।" फिर सईद जाफ़री ने सत्यजित रे साहब से पूछा कि आप क्या पीना पसंद करेंगे? उन्होंने कहा,"अगली दफ़ा कुछ पिएंगे। वैसे, मैं सिर्फ कोका कोला पीता हूं।" उसके बाद ये दोनों अपने-अपने रास्ते हो लिए। सईद जाफ़री बेरूत से अमेरिका चले गए। और सत्यजित रे बेरूत से भारत आ गए।
उस पहली मुलाकात के बाद इन दोनों की और कुछ मुलाकातें भी हुई थी। अधिकतर इनका मिलना लंदन स्थित इंडियन हाईकमीशन की पार्टीज़ में होता था। सईद जब भी सत्यजित जी से मिले, वो उन्हें याद दिलाते रहते कि मैं अभी भी आपकी फिल्म में काम करने का इंतज़ार कर रहा हूं। सत्यजित रे साहब भी हंसकर उनसे कहते कि एक दिन तुम ज़रूर मेरी फिल्म में काम करोगे। आखिरकार 8 जनवरी 1976 को सईद जाफ़री को अपने लदंन स्थित फ्लैट पर एक चिट्ठी मिली। उन्होंने वो चिट्ठी खोली। बड़ी ही खूबसूरत हैंडराइटिंग थी। अंग्रेजी में लिखी वो चिट्ठी उन्हें सत्यजित रे साहब ने भारत से भेजी थी।
उस चिट्ठी में सत्यजित रे साहब ने लिखा था,"डियर सईद, मैं अपनी पहली हिंदी फिल्म बन रहा हूं जिसका नाम "शतरंज के खिलाड़ी" होगा। ये फिल्म प्रेमचंद की एक कहानी पर बेस्ड होगी। उसमें मीर रोशन अली नाम का एक कैरेक्टर है जिसे मैं तुमसे कराना चाहता हूं।" इस तरह सईद जाफ़री शतरंज के खिलाड़ी फिल्म का हिस्सा बने। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही सईद जाफरी पहली दफा संजीव कुमार जी से भी मिले थे। "शतरंज के खिलाड़ी" खुद सईद जाफ़री की पहली फिल्म भी थी। और ये सईद जाफ़री ही थे जिन्होंने रिचर्ड एटनबरॉ से सत्यजित रे साहब की मुलाकात कराई थी। रिचर्ड एटनबरॉ खुद भी सत्यजित रे के कद्रदान थे। इसलिए वो भी फौरन फिल्म में काम करने को तैयार हो गए।
आज सईद जाफ़री जी की डेथ एनिवर्सरी है। आज 10 साल हो गए इन्हें इस दुनिया से गए हुए। 15 नवंबर 2015 को सईद जाफ़री जी का देहांत हुआ था। किस्सा टीवी इस शानदार कलाकार को बहुत सम्मान से याद करते हुए, इन्हें नमन करता है। स
किस्साटीवी से साभार

aeed Jaffrey | वो Actor जिसने Hollywood में खूब डंका बजाया | Biography

 

Saeed Jaffrey. सिनेमा हो या फिर टेलिविजन। बॉलीवुड हो या फिर हॉलीवुड। एक्टिंग के लगभग हर मीडियम में इन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 

अभी तक कोई दूसरा ऐसा भारतीय कलाकार नहीं हुआ है जो हॉलीवुड फिल्मों में इनके जैसा रुतबा हासिल कर सका हो। 

70 साल लंबे अपने फिल्मी करियर में सईद जाफरी ने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया और अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया।

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Saeed Jaffrey Biography - Photo: Social Media

आज Meerut Manthan पर कहानी कही जाएगी Saeed Jaffrey की। भारत से कैसे Saeed Jaffrey हॉलीवुड पहुंचे और कैसे ये फिल्मों में इतना बड़ा नाम बने, ये पूरा किस्सा आज हम और आप जानेंगे।

Saeed Jaffrey की शुरूआती ज़िंदगी

सईद जाफरी का जन्म हुआ था 8 जनवरी 1929 को पंजाब के मलेरकोटला के एक पंजाबी मुसलमान परिवार में। उस ज़माने में इनके नाना खान बहादुर फज़ले इमाम मलेर कोटला के दीवान थे। 

ये एक बहुत बड़ा ओहदा था। इनके पिता का नाम था डॉक्टर हामिद हुसैन जाफरी और वो ब्रिटिश इंडिया के हेल्द सर्विस डिपार्टमेंट में सिविल सर्वेंट थे।

अलग-अलग शहरों में गुज़रा Saeed Jaffrey का बचपन

अक्सर इनके पिता का तबादला भारत के अलग-अलग शहरों में होता रहता था। इनका बचपन मुज़फ्फरनगर, लखनऊ, मिर्ज़ापुर, कानपुर, अलीगढ़, मसूरी, गोरखपुर और झांसी जैसे शहरों में गुज़रा। 

साल 1938 में इन्होंने अलीगढ़ के मिंटो सर्किल स्कूल में दाखिला लिया। यहीं पर सईद जाफरी को मिमिक्री का शौक लगा और वो तरह-तरह की आवाज़ें और अपने टीचरों की नकल उतारने लगे।

मिमिक्री करते-करते ही इन्हें ये भी अहसास हुआ कि थोड़ी सी मेहनत और की जाए तो ये एक बढ़िया मिमिक्री आर्टिस्ट बन सकते हैं। ये अपने स्कूल में कई हॉलीवुड सितारों की भी नकल उतारते थे। 

स्कूल में ही इन्होंने पहली दफा एक नाटक में काम किया और उस नाटक में इन्होंने औरंगजेब के सीधे-सादे भाई दारा शिकोह का किरदार निभाया।

इन सब के फैन थे Saeed Jaffrey

अलीगढ़ ही वो शहर भी था जहां से सईद जाफरी ने फिल्में देखना शुरू किया था। अलीगढ़ के सिनेमाघरों में इन्होंने मोतीलाल, पृथ्वीराज कपूर, नूर मोहम्मद चार्ली, फियरलैस नादिया और दुर्गा खोटे जैसे भारतीय सिनेमा के शुरुआती सुपरस्टार्स की फिल्में देखी और ये उनके फैन हो गए। अलीगढ़ में इन्होंने पढ़ाई के अलावा उर्दू भाषा पर भी अच्छी पकड़ हासिल की।

मसूरी से इलाहबाद यूनिवर्सिटी तक Saeed Jaffrey का सफर

अलीगढ़ के बाद 1941 में इन्होंने मसूरी के विनबर्ग एलन स्कूल में दाखिला लिया और वहां पर इन्होेंने अंग्रेजी में महारत हासिल की। खासतौर पर ब्रिटिश एक्सेंट पर। 

यहां भी इन्होंने नाटकों में हिस्सा लेना जारी रखा और स्कूल के एनुअल डे पर होने वाले नाटकों में ये कोई ना कोई रोल निभाया करते थे।

यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने मसूरी के ही सेंट जॉर्ज कॉलेज में दाखिला ले लिया।

इसके बाद 1945 में सईद जाफरी ने इलाहबाद यूनिवर्सिटी में बीए इन इंग्लिश लिटरेचर में दाखिला लिया। फिर इलाहबाद यूनिवर्सिटी से ही इन्होंने मेडिवियल इंडियन लिटरेचर में एमए किया।

ऑल इंडिया रेडियो से जुड़े Saeed Jaffrey

एमए कंप्लीट करने के बाद सईद दिल्ली आ गए और 250 रुपए महीना तनख्वाह पर इन्होंने ऑल इंडिया रेडियो जॉइन कर लिया। इस समय तक भारत अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हो चुका था। 

भारत का बंटवारा हो चुका था और सईद जाफरी के भी कई रिश्तेदार भारत छोड़कर पाकिस्तान जा चुके थे। 

ऑल इंडिया रेडियो में ही सईद जाफरी की मुलाकात मधुर बहादुर से हुई थी जो कि आगे चलकर उनकी पत्नी बनी थी। पहली पत्नी।

दिल्ली में बनाई खुद की ड्रामा कंपनी

ऑल इंडिया रेडियो में काम करने के साथ ही सईद जाफरी ने दिल्ली में अपना खुद का एक थिएटर ग्रुप भी स्थापित किया। यूनिटी थिएटर कंपनी नाम का इनका थिएटर ग्रुप अंग्रेजी नाटक किया करता था। 

ऑस्कर विल्डी, डिलन थॉमस और विलियम शेक्सपियर जैसे महान अंग्रेजी लेखकों के लिखे नाटकों का मंचन इनका थिएटर ग्रुप किया करता था। 

इस नाटक कंपनी में मधुर बहादुर भी इनके साथ थी और यहीं पर इन दोनों के बीच प्यार का अंकुर फूटना भी शुरू हुआ था।

अमेरिका से किया ड्रामा में एमए

इसी बीच 1956 में मधुर बहादुर को लंदन की रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रैमेटिक आर्ट में पढ़ने का मौका मिला और वो लंदन चली गई। वहीं सईद जाफरी को भी फुलब्राइट स्कॉलरशिप मिल गई। 

सईद अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में ड्रामा स्टडी करने चले गए। अमेरिका में रहते हुए ही इन्होंने प्रोफेशनल एक्टिंग भी शुरू कर दी। 1958 में रिलीज़ हुई अंग्रेजी फिल्म स्टॉक्ड में ये पहली दफा नज़र आए।

हालांकि इनका पहला बड़ा फिल्मी रोल था 1975 में रिलीज़ हुई फिल्म द मैन हू वुड बी किंग में। इस फिल्म में ये बिली फिश नाम के गुरखा सिपाही बने थे। 

इस फिल्म में माइकल केन और सीन कोनरी जैसे बड़े सितारे मौजूद थे। अमेरिका में रहते हुए ही सईद जाफरी ने कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका से ड्रामा में एमए की डिग्री भी हासिल की।

अमेरिका में Saeed Jaffrey ने की मधुर बहादुर से शादी

दूसरी तरफ लंदन में सईद जाफरी से दूरी की वजह से तड़प रही मधुर बहादुर भी अमेरिका आ गई और अमेरिका में इन दोनों ने शादी कर ली। मधुर और इनकी तीन बेटियां हुई। 

इनकी बेटियों के नाम हैं मीरा, ज़िया और शकीना। शकीना ने भी इनकी ही तरह एक्टिंग में करियर बनाया। मधुर और सईद जाफरी ने अमेरिका में शेक्सपीयरन नाटकों का मंचन किया। 

इस तरह सईद जाफरी पहले भारतीय अभिनेता बने जिन्होंने अमेरिका की धरती पर शेक्सपीयरन नाटकों का मंचन किया। 

ये सईद जाफरी ही थे जो इस्माइल मर्चेंट और जेम्स आइवरी का साथ लाए और मर्चेंट-आइवरी फिल्म कंपनी की स्थापना कराई। 70 और 80 के दशक में मर्चेंट आइवरी फिल्मों का ये अभिन्न हिस्सा थे।

इस फिल्म से की हिंदी सिनेमा में शुरूआत

हिंदी सिनेमा की बात करें तो पहली दफा ये सत्यजीत रे की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में नज़र आए थे। उसके बाद विनोद पांडे की एक बार फिर और संई परांजपे की चश्मे बद्दूर में इन्होंने काम किया। 

1982 में रिलीज़ हुई रिचर्ड ओटनबोरो की फिल्म गांधी में इन्होंने सरदार पटेल का किरदार निभाया था। 

और केवल फिल्मों में ही नहीं, इन्होंने कुछ ब्रिटिश टीवी शोज़ में भी काम किया था जैसे कि द ज्वैल इन द क्राउन, तंदूरी नाइट्स और द लिटिल नेपोलियन्स।

ऐसी थी Saeed Jaffrey की निजी ज़िंदगी

सईद जाफरी की निज़ी ज़िंदगी की तरफ रुख करें तो ये तो हमने आपको बता ही दिया कि इनकी पत्नी का नाम मधुर बहादुर था और उनसे इनकी तीन बेटियां थी। लेकिन मधुर के साथ इनकी शादी एक वक्त के बाद टूट गई। 

इन्होंने मधुर से तलाक ले लिया। उसके बाद इन्होंने जेनिफर सोरेल नाम की एक ब्रिटिश महिला से शादी कर ली। 

इनके दो भाई थे जिनके नाम थे वाहिद और हमीद। वहीं शगुफ्ता नाम की इनकी एक बहन भी थी।

सईद जाफरी की प्रमुख फिल्में

इनकी प्रमुख हिंदी फिल्मों की बात करें तो ये नज़र आए आगमन, मासूम, मंडी, किसी से ना कहना, मशाल, राम तेरी गंगा मैली, सागर, खुदगर्ज़, औलाद, हीरो हीरालाल, चालबाज़, राम लखन, दिल, घर हो तो ऐसा, अजूबा, हिना, एक ही रास्ता, आशिक आवारा, दिलवाले, सलामी, ये दिल्लगी, जय विक्रांता, राजा की आएगी बारात, दीवाना मस्ताना, आंटी नंबर वन और अलबेला जैसी फिल्मों में। 

15 नवंबर 2015 को 86 साल की उम्र में ब्रेन हैमरेज के चलते सईद जाफ़री का निधन हो गया। इनके निधन के बाद भारत सरकार ने इन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाज़ा था। वहीं ये पहले ऐसे भारतीय थे जिन्हें ब्रिटेन ने ओबीई सम्मान दिया था।

सईद जाफ़री को दिल से सैल्यूट

देश-विदेश में अपने टैलेंट का डंका बजाने वाले सईद जाफ़री की ज़िंदगी की कहानी को शब्दों की सीमा में बांधना काफी मुश्किल काम है। सईद जाफ़री ने ज़िंदगी के कई रंग रूप देखे थे। 

कई ऐसे काम किए थे जो उनसे पहले किसी भारतीय ने नहीं किए थे। Meerut Manthan इस शानदार कलाकार को सैल्यूट करता है। जय हिंद।

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