राज कुमार किस्सा टीवी से साभार

 ये उस ज़माने की कहानी है जब राजकुमार जी का नाम कुलभूषण पंडित हुआ करता था। मतलब कि वो फ़िल्म इंडस्ट्री में नहीं आए थे। वो पुलिस अफ़सर थे। और बंबई के जिस थाने में तैनात थे, उसके ठीक सामने मिस्टर खान नाम के एक मजिस्ट्रेस भी रहते थे। उनसे राजकुमार उर्फ़ कुलभूषण पंडित की जान-पहचान थी। जबकी मिस्टर खान के एक भाई अली से कुलभूषण पंडित की दोस्ती थी। उन्हीं अली साहब की जान-पहचान तब फ़िल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों से भी थी। 


चूंकि कुलभूषण पंडित शानदार व्यक्तित्व के मालिक थे, तो मिस्टर अली अक्सर उनसे कहा करते थे कि आपको तो फ़िल्मों में होना चाहिए। लेकिन उस ज़माने में कुलभूषण पंडित को फ़िल्में देखने का कोई शौक नहीं था। इसलिए वो मिस्टर अली से हंसकर मना कर दिया करते थे। उस ज़माने में कुलभूषण पंडित जी को फ़िल्मों में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं हुआ करती थी। मगर मिस्टर अली बार-बार कुलभूषण पंडित से फ़िल्मों में आने की बात कहते रहते थे।


आखिरकार एक दिन कुलभूषण पंडित ने मिस्टर अली की बातों पर ज़रा गौर दिया। और वो उनके साथ जाकर उस दौर के बड़े डायरकेक्टर के.बी.लाल से मिले। के.बी.लाल को भी कुलभूषण पंडित का व्यक्तित्व प्रभावशाली लगा। के.बी. लाल ने कुलभूषण पंडित का एक फ़ोटोसेेशन किया। उनकी कुछ बढ़िया-बढ़िया तस्वीरें निकाली। और उनक तस्वीरों को के.बी.लाल ने अपने पास रख लिया। 


उस ज़माने में एक डायरेक्टर-प्रोड्यूसर हुआ करते थे, जिनका नाम था एस.यू.सनी। सनी साहब को कुलभूषण जी की तस्वीरें बहुत अच्छी लगी। वो कुछ तस्वीरें अपने साथ ले गए। के.बी.लाल की जब कुलभूषण पंडित से बढ़िया बातचीत हो गई तो वो कुछ ज़्यादा ही फ्रेंडली होने लगे। इतना जितना कुलभूषण पंडित को भी पसंद नहीं आता था। के.बी.लाल अक्सर कुलभूषण पंडित को फ़ेमस स्टूडियो घुमाने ले जाया करते थे। और उनकी आदत थी कि वो घूमते-घुमाते वक्त कुलभूषण पंडित की कमर पर हाथ रख लेते थे। 


के.बी.लाल की ये कमर पर हाथ रखने वाली बात कुलभूषण पंडित को ज़रा भी पसंद नहीं आती थी। जब कई दिन हो गए तो आखिरकार कुलभूषण पंडित ने के.बी.लाल को कह ही दिया कि अगर आप अपना हाथ मेरी कमर से हटा लेंगे तो मैं ज़मीन पर गिर नहीं पड़ूंगा। इसलिए आप अपना हाथ हटा लीजिए। उनकी ये बात सुनकर के.बी. लाल झेंप गए थे। 


उस ज़माने में एक एक्टर-डायरेक्टर हुआ करते थे जिनका नाम था नजम नकवी। उनकी एस.यू.सनी साहब से दोस्ती थी। वो अक्सर सनी साहब के ऑफ़िस जाते रहते थे। एक दिन नजम नक़वी ने सनी साहब के यहां कुलभूषण पंडित की तस्वीरें देखी। उन्हें भी कुलभूषण पंडित की शख्सियत बहुत पसंद आई। और एक दिन नजम नक़वी कुलभूषण पंडित से मिलने उस थाने पहुंच गए जहां कुलभूषण पंडित उस समय तैनात थे। 


नजम नक़वी ने पहले उन्हें अपना परिचय दिया। थोड़ी बातचीत की। फिर नजम नक़वी ने कुलभूषण पंडित को अपनी फ़िल्म रंगीली में काम करने का ऑफ़र दिया। साथियों इस समय तक कुलभूषण पंडित के मन में भी फ़िल्मों के प्रति दिलचस्पी पैदा हो चुकी थी। जबकी कहां एक समय पर वो फ़िल्में देखना तक पसंद नहीं करते थे। तो नजम नक़वी के ऑफ़र को कुलभूषण पंडित ने स्वीकार कर लिया। और यूं साल 1952 की फ़िल्म रंगीली से कुलभूषण पंडित का फ़िल्मी करियर शुरू हो गया। 


इसी फ़िल्म से ही वो कुलभूषण पंडित से राज कुमार भी हो गए थे। उनकी पहली हीरोइन थी रिहाना, जिन्हें आप तस्वीर में देख भी सकते हैं। इस फ़िल्म के अन्य प्रमुख कलाकार थे महमूद, लीला मिश्रा व एस. नज़ीर। चिक चॉकलेट ने इस फ़िल्म का म्यूज़िक कंपोज़ किया था। और सभी गीत लिखे थे राजा मेहदी अली खान ने। फ़िल्म में कुल 9 गीत थे जिन्हें शमशाद बेगम, लता मंगेशकर, जी.एम.दुर्रानी, गीता रॉय व किशोर कुमार ने अपनी आवाज़ें दी थी।


किशोर दा ने इस फ़िल्म में जो गीत गाया था उसका ज़िक्र करना ज़रूरी है। क्योंकि उससे एक छोटी सी, लेकिन दिलचस्प बात जुड़ी है। किशोर दा ने जो इस रंगीली फ़िल्म में गाना गाया था उसके बोल हैं "बइयां छोड़ो बालम घर जाना रे।" इस गीत की खासियत ये है कि इसमें मेल व फ़ीमेल, दोनों आवाज़ें किशोर दा ने दी हैं। ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने 1962 की हाफ़ टिकट फ़िल्म के गीत "आके सीधी लगी दिल पे जैसे कटरिया" गीत में दी थी।


साथियों आज राज कुमार जी की पुण्यतिथि है। साल 1996 में आज ही के दिन, 3 जुलाई को राज कुमार जी का देहांत हुआ था। राज कुमार जी को किस्सा टीवी का नमन। शत शत नमन। #RaajKumar #Rehana #rangeeli1952

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