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Showing posts from July, 2025

जानी वाकर

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 "इस शराबी को उठाकर बाहर फेंक दो।" गुरूदत्त जी ने नवकेतन फिल्म्स के स्टाफ से कहा। और वाकई में उस शराबी को बाहर कर दिया गया। हालांकि वो कई शराबी नहीं था। वो थे बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी। जो उस वक्त तक जॉनी वॉकर नहीं बने थे। क्या था वो किस्सा? चलिए, जानते हैं।   ये तो हम सभी जानते हैं कि बलराज साहनी जी ने एक दिन बदरुद्दीन काज़ी को बस में देखा था। उन दिनों बदरुद्दीन बस कंडक्टर हुआ करते थे। और टिकट बनाते वक्त वो तरह-तरह की आवाज़ें निकालकर लोगों का मनोरंजन करते थे। उनका वही अंदाज़ बलराज साहनी जी को पसंद आ गया। एक दिन बलराज साहनी बदरुद्दीन को अपने साथ लेकर पहुंच गए नवकेतन फिल्म्स के ऑफिस। वहां उन्होंने गुरूदत्त की ओर इशारा करते हुए बदरुद्दीन से कहा,"देखो, वो फिल्म का डायरेक्टर है। उसका नाम गुरूदत्त है। अगर तुमने उसे पटा लिया तो तुम्हारा काम बन गया समझो।"   बदरुद्दीन ने सोचा कि वो ऐसा क्या करें जिससे ये डायरेक्टर खुश हो जाए। वो फिल्मों में काम तो करना ही चाहते थे। चंद फिल्मों में वो क्राउड का हिस्सा बन भी चुके थे। लेकिन अब तो चांस था कि उन्हें फिल्म में कोई रोल मिल जाए। ब...

अमजद खान किस्सा tv से साभार

 "तुम्हें लगता है मैं ये रोल सही से निभा पाऊंगा?" एक बेचैनी भरी आवाज़ में अमजद खान ने अपनी पत्नी शैला से पूछा। वो बार-बार शैला से यही पूछ रहे थे। शैला बोली,"बिल्कुल। तुम अच्छे एक्टर हो। मैंने तुम्हारे सभी नाटक देखे हैं।" पत्नी की वो बात सुनकर अमजद बोले,"लेकिन ये नाटक नहीं है। ये फिल्म है। एकदम अलग चीज़ है नाटक से।"  "तो क्या हुआ? तुम लव एंड गॉड फिल्म से जुड़े रहे हो। तुम्हारे पिता भी एक्टर हैं। तुम भी कर लोगे।" परेशान अमजद से शैला बोली। लेकिन उस वक्त बेचैनी अमजद खान पर इतनी हावी थी कि पत्नी की बातों से उन्हें कोई शांति नहीं मिल रही थी। वो बोले,"इस सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता। पता नहीं मैं रोल सही से कर भी सकूंगा कि नहीं।" उसी शाम अमजद खान को शोले की शूटिंग के लिए बैंगलोर निकलना था। लेकिन वो मन ही मन बहुत ज़्यादा बेचैन हो रहे थे। शोले बहुत बड़ी फिल्म थी। उनके पास असफल होने का ऑप्शन नहीं था। उन्हें हर हाल में अच्छा काम करना था। जब बेचैनी कम नहीं हुई तो अमजद खान ने कुरान को अपने माथे से लगा लिया। और आंख बंद करके प्रार्थना करने लगे।  अमजद को ऐ...

राज कुमार किस्सा टीवी से साभार

 ये उस ज़माने की कहानी है जब राजकुमार जी का नाम कुलभूषण पंडित हुआ करता था। मतलब कि वो फ़िल्म इंडस्ट्री में नहीं आए थे। वो पुलिस अफ़सर थे। और बंबई के जिस थाने में तैनात थे, उसके ठीक सामने मिस्टर खान नाम के एक मजिस्ट्रेस भी रहते थे। उनसे राजकुमार उर्फ़ कुलभूषण पंडित की जान-पहचान थी। जबकी मिस्टर खान के एक भाई अली से कुलभूषण पंडित की दोस्ती थी। उन्हीं अली साहब की जान-पहचान तब फ़िल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों से भी थी।  चूंकि कुलभूषण पंडित शानदार व्यक्तित्व के मालिक थे, तो मिस्टर अली अक्सर उनसे कहा करते थे कि आपको तो फ़िल्मों में होना चाहिए। लेकिन उस ज़माने में कुलभूषण पंडित को फ़िल्में देखने का कोई शौक नहीं था। इसलिए वो मिस्टर अली से हंसकर मना कर दिया करते थे। उस ज़माने में कुलभूषण पंडित जी को फ़िल्मों में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं हुआ करती थी। मगर मिस्टर अली बार-बार कुलभूषण पंडित से फ़िल्मों में आने की बात कहते रहते थे। आखिरकार एक दिन कुलभूषण पंडित ने मिस्टर अली की बातों पर ज़रा गौर दिया। और वो उनके साथ जाकर उस दौर के बड़े डायरकेक्टर के.बी.लाल से मिले। के.बी.लाल को भी कुलभूषण पंडित का व...