शारद सक्सेना
ट्रिंग-ट्रिंग, ट्रिंग-ट्रिंग। शरत जी ने फोन उठाया। उधर से आवाज़ आई,"मैं प्राण बोल रहा हूं।" वो छुट्टी का दिन था। शरत जी के घर पर एक छोटी सी पार्टी चल रही थी। फुल माहौल बना हुआ था। शरत सक्सेना जी हल्के से सुरूर में थे। उन्होंने कहा,"कौन प्राण?" उधर से जवाब आया,"अरे भई एक्टर प्राण।" शरत जी का नशा फौरन हल्का हो गया। वो एक कुर्सी पर बैठे थे जब उन्होंने फोन उठाया। लेकिन ये पता चलते ही कि प्राण साहब का फोन है, शरत जी कुर्सी से उठ खड़े हुए।
प्राण साहब आगे बोले,"गुंडाराज में तुमने जो काम किया है वो मुझे बहुत अच्छा लगा। शाबास। ऐसे ही काम करते रहो।" प्राण साहब फोन रखने ही वाले थे कि शरत सक्सेना ने उनसे कहा,"सर, मैं एक दफा आपसे मिलना चाहता हूं।" जवाब में प्राण साहब ने कहा,"कभी भी आ जाओ बच्चे। कोई दिक्कत नहीं।" अगले दिन शरत सक्सेना प्राण साहब के घर गए और उनसे मुलाकात की। तमाम ज़रूरी बातें की। प्राण साहब से एक्टिंग की टिप्स ली। और फिर पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।
आज शरत सक्सेना जी का जन्मदिन है। 17 अगस्त 1950 को मध्य प्रदेश के सतना में शरत सक्सेना जी का जन्म हुआ था। यानि आज सरत सक्सेना 74 साल के हो चुके हैं। लेकिन इस उम्र में भी शरत जी ने खुद को इतना फिट रखा है कि आज के कई नौजवान(मेरे जैसे) उन्हें देखकर शरमा जाएं। शरीर को तंदरुस्त रखने की ये प्रेरणा शरत सक्सेना जी को अपने पिता से मिली है। शरत जी के पिता भी एक्सरसाइज़ वगैरह खूब किया करते थे। वो अपने इलाके के नामी पहलवान थे।
चलिए साथियों, शरत जी के बारे में और भी कुछ बातें जानते हैं। लेख पूरा पढ़िएगा। आपको शरत जी की ये रोचक कहानियां ज़रूर पसंद आएंगी। ना पसंद आएं तो डिसलाइक कर दीजिएगा। पसंद आए तो लाइक के साथ-साथ शेयर भी कर दीजिएगा। मेहनत वसूल हो जाएगी। चलिए, शरत जी की कहानियां शुरू करते हैं।
बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके इसके लिए शरत सक्सेना जी के पिता सतना से भोपाल शिफ्ट हो गए थे। 10वीं तक शरत जी भोपाल में ही पढ़े। स्कूली दिनों में ही शरत जी ने एक्टर बनने का ख्वाब देखना शुरू कर दिया था। पिता की ही तरह ये भी अच्छी कद-काठी के थे। कसरत भी खूब किया करते थे। इसलिए जब खुद को शीशे में निहारते थे तो इन्हें लगता था कि ये तो एक वैरी गुड लुकिंग मैन हैं। इन्हें तो फिल्मों में ही काम करना चाहिए।
स्कूली दिनों में ही शरत जी को FTII की जानकारी मिल गई थी। इसलिए ये भी जल्द से जल्द एफटीआईआई जॉइन करना चाहते थे। ये बात शरत जी ने जब अपने पिता को बताई तो उन्होंने कहा कि पहले इंजीनियर बन जाओ। फिर जो मर्ज़ी आए वो कर लेना। पिता के आदेश का पालन करते हुए इन्होंने 12वीं पास की और फिर जबलपुर के एक कॉलेज से इलैक्ट्रोनिक्स एंड टैलीकॉम इंजीनियर की डिग्री ली। इंजीनियरिंग कंप्लीट करने के बाद शरत जी ने अपने पिता से पूछा कि क्या अब वो एक्टर बनने का अपना ख्वाब पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं।
चूंकि पिता ने वादा किया था तो इस दफा उन्होंने शरत जी को परमिशन दे दी। शरत सक्सेना मुंबई आ गए। शरत जी को लगा कि अब तो जल्द ही वो हीरो बन जाएंगे। काम पाने के लिए उन्होंने तमाम डायरेक्टर्स-प्रोड्यूसर्स के ऑफिसों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। कास्टिंग एजेंट्स से दोस्ती बनाने लगे। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मुंबई आए जब कई महीने बीत गए तो एक दिन शरत जी को एक चिट्ठी मिली। वो चिट्ठी इनके पिता जीने भेजी थी।
उस चिट्ठी में पिता जी ने लिखा था कि समय बर्बाद करना बंद करो और कोई नौकरी तलाश करो। फिल्मों में कुछ हो नहीं रहा था। इसलिए शरत जी ने भी नौकरी तलाशनी शुरू कर दी। जल्द ही उन्हें एक नौकरी मिल भी गई। पर चूंकि एक्टर बनने का जुनून खत्म नहीं हुआ था तो शरत जी किसी ना किसी तरह से फिल्म इंडस्ट्री के टच में रहना चाहते थे। उन्होंने एक कैमरा खरीदा। अब वो फोटोग्राफी सीखना चाहते थे। दिन में नौकरी करते और रात को फोटोग्राफी सीखते।
एक ही महीने में शरत सक्सेना जी को अहसास हो गया कि नौकरी करेंगे तो वो कभी कोई दूसरा काम नहीं कर सकेंगे। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ी और पूरी तरह से फोटोग्राफी पर फोकस करना शुरू कर दिया। फोटोग्राफी सीखने में उनकी मदद चंदन घोष नामक एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर कर रहे थे जो शरत सक्सेना के स्कूल के दिनों के दोस्त भी थे। शरत जी उनके असिस्टेंट बनकर काम कर रहे थे। और उनके साथ रहकर शरत जी को फोटोग्राफी की कई बारीकियां सीखने को मिली।
एक दिन चंदन घोष धर्मेंद्र जी के भाई वीरेंद्र का फोटोशूट कर रहे थे। उस फोटोशूट के वक्त शरत सक्सेना भी वहां मौजूद थे। शरत सक्सेना रिफ्लेक्टर पकड़कर खड़े थे। फोटोशूट खत्म हुआ तो वीरेंद्र जी ने कहा,"आओ लड़कों। तुम दोनों को खाना खिलाते हैं।" संघर्ष का दौर था। उस दौर में किसी अच्छे रेस्टोरेंट में खाने का ऑफर भला कौन छोड़ सकता था। सो शरत जी व उनका दोस्त वीरेंद्र जी के साथ खाना खाने एक अच्छे से रेस्टोरेंट में चले गए।
खाने के दौरान वीरेंद्र जी ने शरत सक्सेना जी से पूछा,"क्या तुम भी एक्टर बनना चाहते हो?" शरत जी ने हामी भरी तो वीरेंद्र जी ने उनसे कुछ तस्वीरें देने को कहा। उस वक्त शरत जी के पास अपनी तस्वीरें नहीं थी। लेकिन जिस जगह वो रेस्टोरेंट था उससे वो जगह बहुत अधिक दूर नहीं थी उन दिनों जहां शरत जी रहा करते थे। वो फौरन अगने ठिकाने की तरफ दौड़े। और कुछ ही देर में अपनी कुछ अच्छी-अच्छी तस्वीरें लेकर वापस आए और उन्हें वीरेंद्र जी को दे दिया।
वीरेंद्र जी ने शरत सक्सेना की तस्वीरें अपने पास रख ली। अगले ही दिन वीरेंद्र जी ने एक प्रोड्यूसर को शरत सक्सेना जी की वो तस्वीरें दिखाई। उस प्रोड्यसूर को शरत सक्सेना की पर्सनैलिटी अपनी अपकमिंग फिल्म के एक छोटे से कैरेक्टर के लिए परफेक्ट लगी। उसने शरत सक्सेना को अपनी उस फिल्म में काम करने का ऑफर भिजवाया जिसे शरत जी ने फौरन स्वीकार कर लिया। वो फिल्म थी 1974 में रिलीज़ हुई बेनाम, जिसमें अमिताभ बच्चन हीरो व मौसमी चटर्जी हीरोइन थी।
करियर की शुरुआत में शरत सक्सेना जी ने छोटे-छोटे एक्शन रोल्स ही निभाए। कहां तो वो हीरो बनने आए थे। और कहां सिर्फ विलेन के हैंचमैन बनकर रह गए। एक्शन फिल्मों में काम करने के दौरान कई दफा शरत सक्सेना चोटिल भी हुए। उनमें से कुछ चोटें तो बहुत गंभीर भी थी। उस दौर में एक्शन सीन्स करने वाले कलाकारों को मरहम-पट्टी अपने पास रखनी पड़ती थी। शरत सक्सेना जी के पास भी वो सब सामान हुआ करता था जो तब एक्शन रोल्स करने वाले छोटे कलाकारों पर होता था।
उन्हीं दिनों शरत सक्सेना की जान-पहचान सलीम खान से हो गई। एक दिन शरत जी सलीम खान के घर पहुंचे तो देखा कि वहां जावेद अख्तर भी मौजूद हैं। उस वक्त सलीम-जावेद काला पत्थर की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे। उस दिन बातों ही बातों में सलीम खान ने जावेद अख्तर से कहा कि क्यों ना शरत को धन्ना के रोल में कास्ट किया जाए। जावेद अख्तर को भी सलीम खान का विचार सही लगा। उसके बाद सलीम खान जी ने शरत जी से कहा कि तुम अभी यश चोपड़ा के ऑफिस जाओ और उनसे कहो कि मुझे सलीम-जावेद ने धन्ना के रोल के लिए भेजा है।
शरत जी उसी दिन यश चोपड़ा के ऑफिस जाकर उनसे मिले। उन्होंने सलीम-जावेद का रेफरेंस दिया और पूरी बात उन्हें बताई। यश चोपड़ा जी को भी शरत जी की पर्सनैलिटी धन्ना के किरदार के हिसाब से एकदम फिट लगी। उन्होंने फौरन शरत सक्सेना को उस रोल के लिए फाइनल कर दिया। इस तरह शरत सक्सेना काला पत्थर फिल्म का हिस्सा बने। एक इंटरव्यू में शरत जी ने कहा था कि करियर के शुरुआती दौर में सलीम-जावेद ने उनकी बहुत मदद की थी। उन्हें कई फिल्मों में काम दिलाया था।
फिल्म खुदा गवाह में शरत सक्सेना एक स्मगलर बने थे। उस फिल्म में एक सीन था जिसमें शरत सक्सेना ड्रग्स के नशे में ट्रक सहित समंदर में गिर जाते हैं। उस सीन की शूटिंग शुरू होने से पहले शरत सक्सेना जी ने शर्क के नीचे लाइफ जैकेट पहन ली थी। सीन के लिए शरत जी को किसी चीज़ से बांधकर पानी में उतारा गया। आधे-पौने घंटे में सीन कंप्लीट हुआ। डायरेक्टर मुकुल आनंद ने सीन कंप्लीट होते ही पैकअप का आदेश दे दिया।
डायरेक्टर के मुंह से पैकअप शब्द सुनते ही क्र्यू मेंबर्स अपना सामान ऐसे पैक करने लगे जैसे उन्हें किसी जेल से छुट्टी मिल गई हो। लेकिन किसी का भी ध्यान शरत सक्सेना पर नहीं रहा। शरत अभी भी पानी में फंसे हुए थे। और चूंकि उन्हें बांधा गया था तो वो खुद से बाहर निकल नहीं सकते थे। उन्होंने काफी आवाज़ लगाई। लेकिन कोई उन्हें वहां से निकालने नहीं आया। सब सामान पैक करने में बिज़ी हो गए। काफी देर बाद फिल्म के प्रोड्यूसर अपने एक असिस्टेंट के साथ लोकेशन का मुआयना करने निकले।
प्रोड्यूसर के कानों में शरत सक्सेना के चीखने की आवाज़ पड़ी। उन्होंने ध्यान से देखा तो पता चला कि ये तो शरत है। इसे किसी ने बाहर ही नहीं निकाला। प्रोड्यूसर ने तभी एक बोट मंगाई और शरत को वहां से बाहर निकाला। ज़िम्मेदार क्र्यू मेंबर्स की उस दिन ढंग से क्लास लगाई गई। जबकी कुछ को तो आईडिया ही नहीं था कि शरत के साथ हुआ क्या। शरत जब समंदर से निकलकर बाहर आए तो फिल्म यूनिट के एक आदमी ने इनसे कहा,"अरे शरत, कहां रह गए थे भई? खाना भी नहीं खाया तुमने तो।" शरत सक्सेना को उस आदमी पर गुस्सा तो बहुत अया। लेकिन वो कुछ बोले नहीं। चुपचाप खाना खाने लगे।
अमरीश पुरी साहब के साथ शरत सक्सेना जी ने कई फिल्मों में काम किया था। अधिकतर फिल्मों में तो शरत सक्सेना अमरीश पुरी के चमचे के किरदार में नज़र आते थे। लेकिन बाद में एक दौर ऐसा आया जब अमरीश पुरी जी ने विलेन के रोल निभाने कम कर दिए। एक फिल्म में अमरीश पुरी शरीफ इंसान के किरदार में थे। जबकी शरत सक्सेना निगेटिव रोल में थे। फिल्म की कहानी के मुताबिक एक सीन में शरत सक्सेना को अमरीश पुरी साहब को थप्पड़ मारना था।
शरत सक्सेना ने अमरीश पुरी जी को थप्पड़ मारने से इन्कार कर दिया। उन्होंने डायरेक्टर से कहा, देखो भईया। हम तो आजतक अमरीश पुरी जी के चमचे ही फिल्मों बनते आए हैं। अब हम अपने बॉस पर हाथ नहीं उठाएंगे। अमरीश पुरी जी को जब पता चला कि शरत सक्सेना ने उस सीन को शूट करने से इन्कार कर दिया है तो वो मुस्कुराए। फिर शरत जी के पास जाकर बोले,"ये तो फिल्म है बेटा। इसमें तो तुम मुझे थप्पड़ मार सकते हो।" शरत जी तब भी काफी देर तक अमरीश पुरी जी पर हाथ उठाने को नहीं माने। हालांकि अमरीश पुरी जी ने जब उन्हें एक्टिंग के नियमों का हवाला दिया तो वो मान गए।
जबलपुर में जब शरत सक्सेना इंजीनियरिंग कर रहे थे तब इनकी दोस्ती एक ऐसे लड़के से हो गई जो नेतागीरी में बहुत रहता था। उस लड़के का यूथ कांग्रेस के लड़कों से कुछ पंगा था। एक दिन यूथ कांग्रेस के 10-12 लड़कों ने शरत सक्सेना के उस दोस्त को घेर लिया और कूटना शुरू कर दिया। दोस्त को बचाने शरत आगे आए तो इनकी भी ज़बरदस्त कुटाई कर दी गई। सिर फोड़ दिया गया। उस दिन शरत को इतना पीटा गया था कि ये बेहोश हो गए थे। #SharatSaxena #happybirthday
किस्सा टीवी से साभार
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