संगीतकार मदन मोहन

 एक दफा मदन मोहन जी ने एक गज़ल कंपोज़ की थी जिसके बोल थे 'है इसी में प्यार की आबरू। वो जफ़ा करे मैं वफ़ा करूं।' ये गज़ल 1962 में आई फिल्म अनपढ़ में है। और इसे लता जी ने गाया था। ये गज़ल राजा मेहदी अली खान साहब ने लिखी थी। उस दौर के एक और दिग्गज संगीतकार नौशाद साहब को ये गज़ल बहुत पसंद आई। इतनी पसंद आई कि नौशाद मदन मोहन जी की तारीफ करने उनके घर पहुंच गए। वहां नौशाद साहब ने मदन मोहन जी से कहा कि तुम्हारी इस गज़ल पर मैं अपना सारा संगीत निसार करता हूं। कितनी बेहतरीन गज़ल कंपोज़ की है तुमने। 


नौशाद मदन मोहन जी से सीनियर थे। एक सीनियर, वो भी नौशाद, उनके मुंह से अपनी इतनी तारीफ सुनकर मदन मोहन जी की आंखें खुशी से भर आई। वो बोले,"कैसी बात करते हैं नौशाद साहब। मैं तो आपसे इतना जूनियर हूं। आपकी बराबरी कहां कर सकूंगा।" नौशाद ने कहा,"इसमें जूनियर-सीनियर वाली कोई बात नहीं है। तुमने जो कंपोज़ किया है वो बहुत अच्छा है। और अच्छी चीज़ की तारीफ होनी ही चाहिए। तुमने बहुत अच्छी गज़ल बनाई है। आज तो मैं ये बात इस चार दीवारी में कह रहा हूं। कल को किसी पब्लिक मीटिंग में भी मैं ऐसा ही कहूंगा।" 


और नौशाद साहब ने जो कहा था वो किया भी। एक प्रैस कॉन्फ्रैंस में नौशाद साहब ने वही बात दोहराई थी जो उस दिन उन्होंने मदन मोहन जी के सामने कही थी। ये थे पुराने लोग। साथियों, आज महान मदन मोहन जी का जन्मदिवस है। 25 जून 1924 को ईराक के बगदाद शहर में मदन मोहन कोहली जी का जन्म हुआ था। इनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल कोहली वहां ईराकी पुलिस विभाग में अकाउंटेंट जनरल की हैसियत से काम कर रहे थे। मदन मोहन जी को किस्सा टीवी का नमन। आईए, मदन मोहन जी से जुड़ी एक और रोचक कहानी भी जानते हैं। 


मदन मोहन जी के पुत्र संजीव कोहली जी की बड़ी तमन्ना थी कि उनके पिता किसी ऐसी फिल्म में संगीत दें जिसमें हेमा मालिनी हीरोइन हों और अमिताभ बच्चन हीरो हों। यूं तो मदन मोहन जी ने अमिताभ बच्चन की फिल्म परवाना का संगीत दिया था। मगर उसमें हेमा जी नहीं थी। ऐसे ही हेमा जी की फिल्म 'शराफत छोड़ दी मैंने' का संगीत भी मदन मोहन ने कंपोज़ किया था। लेकिन उसमें अमिताभ जी नहीं थे। दुर्भाग्यवश बेटे संजीव कोहली की हसरत पूरी करने से पहले ही मदन मोहन जी ने ये दुनिया छोड़ दी। 


मदन मोहन जी के दुनिया से जाने के बाद उनके बेटे संजीव कोहली को उनका एक पुराना टेप रिकॉर्डर व कई सारे टेप्स मिले। संजीव कोहली ने जब एक-एक करके उन टेप्स को सुना तो उन्हें पता चला कि उनके पिता द्वारा कंपोज़ की हुई सैकड़ों धुनें ऐसी थी जो कभी इस्तेमाल हुई ही नहीं थी। मदन मोहन जी की मृत्यु के बाद उनके संगीत से सजी एक फिल्म रिलीज़ हुई थी जिसका नाम था मौसम। उस फिल्म को गुलज़ार साहब ने बनाया था। और गुलज़ार साहब ने वो फिल्म मदन मोहन जी को समर्पित की थी।


जब मौसम फिल्म का प्रीमियर हुआ था तब गुलज़ार साहब ने मदन मोहन जी के परिवार को विशेषतौर पर बुलाया था। फिल्म इंडस्ट्री की और भी कई हस्तियां उस प्रीमियर में शिरकत करने आई थी। उनमें यश चोपड़ा व उनकी पत्नी पामेला चोपड़ा भी थी। प्रीमियर के बाद यश चोपड़ा व पामेला चोपड़ा जी ने मदन मोहन जी के संगीत की खूब तारीफें की। उनकी तारीफें सुनकर मदन मोहन जी के बेटे संजीव कोहली ने मन ही मन सोचा कि काश कोई ऐसी फिल्म होती जिसे यश चोपड़ा डायरेक्ट करते। उसमें संगीत उनके पिता का होता और हीरो-हीरोइन अमिताभ बच्चन व हेमा मालिनी होते।


वक्त गुज़रा और मदन मोहन जी के बेटे संजीव कोहली ने आईआईएम कोलकाता से अपना एमबीए कंप्लीट करके यशराज फिल्म्स में बतौर सीईओ नौकरी शुरू कर दी। वो यशराज फिल्म्स के पहले सीईओ बने। एक दिन यश चोपड़ा संजीव कोहली से बातें कर रहे थे। उसी दौरान संजीव कोहली ने यश चोपड़ा जी को अपने पिता मदन मोहन जी की उन्हीं सैकड़ों अनयूज़्‍ड कंपोजिशन के बारे में बताया जो उन्होंने उन टेप्स में सुनी थी जो उस दिन उन्हें मिले थे। 


इत्तेफाक से उस दौरान यश चोपड़ा वीर ज़ारा फिल्म को शुरू करने की प्लानिंग कर रहे थे। यश चोपड़ा जी ने संजीव कोहली से कहा कि तुम उन धुनों में से कुछ बेस्ट धुनें सिलेक्ट कर लो। हमारी अगली फिल्म में मदन जी का ही संगीत होगा। इस तरह संजीव कोहली का बरसों पुराना ख्वाब पूरा हो गया। क्योंकि वीर ज़ारा में उनके पसंदीदा एक्टर्स अमिताभ बच्चन व हेमा मालिनी जी ने भी एक छोटा सा रोल निभाया था। और दोनों पर एक गाना भी पिक्चराइज़ किया गया था। #madanmohan

मिस्टर फिल्मी स्टार से साभार

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