राजकुमार

 "जानी...❤️


जानी...हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे, पर बंदूक भी हमारी होगी और गोली भी हमारी होगी और वह वक्त भी हमारा होगा। सौदागर


जब ख़ून टपकता है तो जम जाता है, अपना निशान छोड़ जाता है, और चीख़-चीख़कर पुकारता है कि मेरा इंतक़ाम लो, मेरा इंतक़ाम लो। इंसानियत का देवता


हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते, हम आंखें ही चुरा लेते हैं। तिरंगा


हम तुम्हे वो मौत देंगे जो ना तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी, और ना ही कभी किसी मुजरिम ने सोची होगी। तिरंगा


बिल्ली के दांत गिरे नहीं और चला शेर के मुंह में हाथ डालने. ये बद्तमीज हरकतें अपने बाप के सामने घर के आंगन में करना, सड़कों पर नहीं। बुलंदी


जब राजेश्वर दोस्ती निभाता है तो अफसाने लिक्खे जाते हैं और जब दुश्मनी करता है तो तारीख़ बन जाती है। सौदागर


हम अपने कदमों की आहट से हवा का रुख़ बदल देते हैं। बेताज बादशाह


घर का पालतू कुत्ता भी जब कुर्सी पर बैठ जाता है तो उसे उठा दिया जाता है. इसलिए क्योंकि कुर्सी उसके बैठने की जगह नहीं. सत्य सिंह की भी यही मिसाल है. आप साहेबान ज़रा इंतजार कीजिए। गॉड एंड गन


बच्चे बहादुर सिंह, कृष्ण प्रसाद मौत की डायरी में एक बार जिसका नाम लिख देता है, उसे यमराज भी नहीं मिटा सकता। जंग बाज़


चिनाय सेठ जिनके अपने घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नही फेका करते । वक्त


हिंदी सिनेमा के जानी " राजकुमार " जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि 🙏🏻💐


राजकुमार

8 अक्तूबर 1926 – 3 जुलाई 1996

Comments

Popular posts from this blog

मौत एक ख्याल है जैसे ज़िंदगी एक ख्याल है" भारती गौड़ की वॉल से

उमराव जान किस्सा tv से साभार

सोनू निगम