कोई पत्थर से न मारे मिरे दीवाने को जिया इम्तियाज साहब की फेसबुक वाल से साभार
कुछ दिनों पहले एक मौलाना साहब की रील दिखी, वो बता रहे थे कि फ़िल्म "लैला मजनू" का मशहूर गीत 'कोई पत्थर से ना मारे' ये मिसरा साहिर लुधियानवी का नही बल्कि तुराब काकोरवी नाम के एक शायर का है जिनका ज़माना 1768 से 1858 तक था, ये मिसरा सबसे पहले उनका लिखा मिलता है, तुराब काकोरवी का शे'र ये है
"शहर में अपने ये लैला ने मुनादी कर दी
कोई पत्थर से न मारे मिरे दीवाने को"
अच्छी बात... दूसरे शायरों के मिसरे पर ग़ज़ल लिखना, शाइरी की दुनिया मे बुरा नही माना जाता, वैसे मौलाना साहब के बताने के पहले ही हमें पता था कि ओरिजनल गाना 1976 की कलर फ़िल्म का नही है, बल्कि "कोई पत्थर से ना मारो मेरे दीवाने को" इस गीत का 1957 का एक वर्ज़न हमने अपने बचपन मे खूब सुना था
.... हमारे घर मे 1957 में आई "भाभी" फ़िल्म की ऑडियो कैसेट रखी थी, उसमें लैला मजनूं पर एक गाना था नौटंकी के स्टाईल में... उस गीत में यही लाइन थी 'कोई पत्थर से न..."
इसके अलावा घर मे बड़े बूढ़ों से कुछ हल्की फुल्की लाइनें सुनने को मिलतीं
"मेरा दीवाना कहीं सड़कों पे होगा
कोई नौकर न बना ले मेरे दीवाने को
कोई पत्थर से न मारे..."
.
..... असल में "कोई पत्थर से न मारो" एक ज़माने पहले से लैला मजनूं की नौटंकियों में गाया जाता रहा है ...
.... बड़े बुज़ुर्ग लोगों से हमने इसपर जो हल्के फुल्के लिरिक्स सुने थे, वो लिरिक्स उन बुजुर्गों ने अपने बचपन लड़कपन में गाँव की नौटंकियों में सुने थे ... लैला मजनूं की कहानी का अहम हिस्सा है मजनू को पत्थर मारे जाना, और लैला का उसे बचाने दौड़ना.... फिल्मों से पहले नौटंकी का ज़माना था हमारे यहां.... उसी दौर में नौटंकी के लिये ये लाइन गीत या ग़ज़ल की शक्ल में लिखी गई .... हो सकता है तुराब काकोरवी से भी पहले ये मिसरा किसी और ने किसी नौटंकी के लिये लिखा हो...
.... ख़ैर साहिर साहब ने 1976 में इस मिसरे की ज़मीन में बहुत संजीदा और खूबसूरत गीत लिखा .... वैसे 1957 में भाभी फिल्म में भी गीत सिर्फ फिल्माया कॉमेडी के ढंग में गया है, पर गीत के लिरिक्स जो शायद राजेन्द्र कृष्ण साहब ने लिखे हैं, ये लिरिक्स बहुत ज़बरदस्त.... संजीदा, और खूबसूरत हैं, सुनकर देखियेगा
भाभी फ़िल्म के नौटंकी गीत का वीडियो मैंने फेसबुक पर डाला था, पर कॉपीराइट की वजह से उसे ब्लॉक कर दिया, इसलिये 1976 की लैला मजनू के फोटो के साथ पोस्ट करनी पड़ रही है
बहरहाल भाभी फ़िल्म के नौटंकी गीत की लिंक कमेंट में दूंगा, इसमे सूत्रधार बने भगवान दादा के लिये मन्ना डे ने आवाज़ दी है, ... मजनू बने ओमप्रकाश के लिये एस बलबीर ने, और लैला बने आगा के लिये मोहम्मद रफ़ी ने .... सुनियेगा
"हाय पत्थर से ना मारो मेरे दीवाने को,
दो घड़ी सुन लो ज़रा प्यार के अफसाने को
क़ैस के बदले में तैयार हूं मर जाने को
हाय पत्थर से ना मारो मेरे दीवाने को,"
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