जयंत

 दोस्तों हिंदी सिनेमा में कई कलाकार थे और हैं जिन्होंने कभी एक्टिंग के बारे में नहीं सोचा था...लेकिन किस्मत उन्हें सिल्वर स्क्रीन तक ले आई...ऐसी ही एक कलाकार थे जयंत...जयंत को शायद आप ऐसे न पहचाने लेकिन अगर ये कहा जाए कि जयंत अमजद खान के पिता थे तो शायद उनकी तस्वीर आपको याद आ जाए....जयंत की पहचान एक अच्छे अभिनेता के रूप में बनी और उन्होंने लगभग 150 फिल्मों में अभिनय किया।


फिल्मी दुनिया में कभी न मिटने वाली पहचान बनाने वाली और अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली फिल्म शोले का नाम जब भी आता है तो गब्बर सिंह का किरदार लोगों के जहन में कौंधने लगता है. गब्बर सिंह का किरदार निभाने वाले अमजद खान का नाम और उनके फेमस डॉयलॉग 'जो डर गया...समझो मर गया' आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हैं. खास बात ये है कि मुंबई में अपनी खास पहचान बनाने वाले अमजद खान और उनके पिता जकारिया खान का अलवर से गहरा नाता रहा है. जकारिया खान भी सफल फिल्मी कलाकार रहे हैं. फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले जकारिया अलवर में पुलिस ऑफिसर के पद पर तैनात थे. जिले में जहां वह रहते थे, वहां के लोग आज भी उनको याद करते हैं. दिवंगत जकारिया खान को फिल्मी दुनिया में लोग 'जयंत' के नाम से जानते हैं.


जयंत का जन्म नोदेह पायन (नवा काली), पेशावर, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत, ब्रिटिश भारत में 15 अक्टूबर 1915 को हुआ था. उनका नाम जकारिया खान रखा गया था. वह एक पश्तून परिवार से थे. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पाकिस्तान में पूरी की. उसके बाद वह अपने परिवार के साथ हिंदुस्तान आ गए. हिंदुस्तान में उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की. अलवर के महाराज जय सिंह से जयंत के पिता की दोस्ती थी. इसलिए उनका राज परिवार में आना जाना भी था.


महाराज जयसिंह ने जयंत को पुलिस ऑफिसर का दिया था पद

राज परिवार के प्रतिष्ठित सम्मानीय सलाहकारों में उनकी गिनती हुआ करती थी. महाराज जयसिंह ने जयंत को पुलिस में ऑफिसर का पद दिया था. कई सालों तक उन्होंने पुलिस में ऑफिसर के पद पर नौकरी की. अलवर के कटला क्षेत्र में चर्च के सामने जयंत का मकान है जहां वह अपने परिवार के साथ रहते थे. हालांकि उनके जाने के बाद उस मकान को किसी अन्य बड़े परिवार को बेच दिया गया. स्थानीय लोगों ने कहा कि आज भी उनकी यादें लोगों के जहन में हैं. फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले जयंत अपने दोनों बेटे और परिवार के साथ अलवर में रहते थे. उनके नाम पर आज भी यहां एक संस्था चलती है जिसकी ओर से समय-समय पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

एमएम कृष्णा से साभार

जयंत का निधन उनके बेटे अमजद खान की सबसे सफल फिल्म शोले की रिलीज से दो महीने पहले 2 जून 1975 को 60 साल की उम्र में मुंबई में ही हुआ था. उनकी मृत्यु गले के कैंसर के कारण हुई थी. उन्हें मुंबई में बांद्रा पश्चिम के नौपाड़ा कब्रिस्तान में दफनाया गया था. लोग आज भी अमजद खान व उनके पिता जयंत खान को याद करते हैं.

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