वाचस्पति शर्मा जी की वॉल से
तुम्हे याद करते करते ------------------------ भारतीय सिनेमा के इतिहास में यदि किसी गीत को कामुकता का भाव समेटे हुए उत्कृष्टतम गीत कहा जाए, तो वह "आम्रपाली" फिल्म का यह अमर गीत ही होगा. यह गीत अपनी सोलो परफॉर्मेंस और अभिनेत्री वैजयंती माला जी की अनुपम अभिनय क्षमता के कारण विशिष्ट हो जाता है। उन्होंने अपने एकल प्रदर्शन से रुपहले परदे पर अनगिनत भावों की अनूठी छटा बिखेरी है। ये एक सामंती शोषण से ग्रसित समाज में नगरवधू का तमगा लिए एक बेजोड़ कलाकार और एक नर्तकी के मनोभावों को दर्शाता गीत है.जिसमे वो अपने नगरवधू के सामाजिक स्टेटस से बाहर निकल एक आम स्त्री की तरह अपनी मनोव्यथा को व्यक्त करने के लिए व्याकुल है। वो स्त्रैण इच्छाएं जिनमे प्रेम ,कामुकता और अपने प्रियतम के सानिध्य पाने की दबी छुपी लालसा है। गीत की शुरुआत वैजयंती माला जी के "विचित्र-वीणा" वाद्य यंत्र के तारों को छेड़ते अपनी कामनाओं को व्यक्त करने की झिझक भरी कोशिश से होता है। यह दृश्य मानो किसी स्त्री के अंतरंग क्षणों की झलक है, जिसमें वह अपने प्रेम को छिपाने का असफल प्रयास करती है। ये सीन कुछ ऐसा ही ही जिसमे...