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नोशाद साहब किस्सा tv से साभार

 बैजू बावरा के हर गीत को नौशाद साहब ने किसी ना किसी राग पर आधारित रखा था। हालांकि नौशाद जब बैजू बावरा का म्यूज़िक कंपोज़ कर रहे थे तब उनके सामने एक चुनौती भी थी। नौशाद चाहते थे कि बैजू बावरा के गीतों में भारतीय शास्त्रीय संगीत को प्रमुखता से जगह दी जाए। लेकिन नौशाद को ये भी पता था कि आम जनता, जिसे शास्त्रीय संगीत सुनने की आदत नहीं थी, वो एक हैवी क्लासिकल संगीत की डोज़ को शायद हजम ना कर पाए।  नौशाद की ख्वाहिश थी कि आम लोग भी शास्त्रीय संगीत को सुनने की आदत डालें। इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई। उन्होंने गीतों का संगीत कुछ इस तरह से रचा कि शुरुआती गीत रागों पर आधारित भी रहें, और उनकी ट्यून इतनी हल्की-फुल्की हो कि लोगों को सुनने में मज़ा आए। जबकी आखिर में तानसेन व बैजू के बीच हुए संगीत के महा मुकाबले में उन्होंने विशुद्ध भारतीय शास्त्रीय संगीत रखा। "आज गावत मन मेरो झूमके।" राग देसी पर आधारित इस गीत को उस्ताद अमीर खान और पंडित डी.वी.पलुस्कर ने गाया था।  तानसेन की आवाज़ बने थे उस्ताद अमीर खान। और बैजू को आवाज़ दी थी पंडित डी.वी.पलुस्कर जी ने। नौशाद ने बहुत सोच-समझकर पंडित डी.वी....